Match Making /Kundali Milan

कुंडली मिलान :

ज्योतिष या मिलापक केवल परम्परा का निर्वाह नही है | भावी दंपति के स्वाभाव ,गुड़ ,प्रेम, और आचार-व्यव्हार के समबन्ध के विषय में जानकारी प्राप्त करना है, जब तक समान आचार-व्यव्हार वाले वर-कन्या नही होते, तब तक दंपति जीवन सुख नही हो सकता | भावी जीवन साथी के विषय में जानकारी प्राप्त करना अत्यंत कठिन है|

कूट    लड़का    लड़की            प्राप्त अंक                          अधिकतम अंक

वर्ण

वैश्य

तारा

योनी

गृह्मैत्री

गड़

भकूट

नारी                             कुल गुड़                             ३६

वर्ष फल:

लग्न कुंडली के ग्रह अंको को ध्यान में रखते हुए बारह महीनो के गृह गोचर को ध्यान में रखते हुए जो फलादेश किया जाता है ,उसे वर्ष फल कहते है |

 श्लोक:

लग्न होरा कल्य देहो द्यारन्य रूपं शीर्ष वर्तमान च जन्म |

वित्त विद्या स्वान्न्पानानति भुक्तिं दक्षाक्ष याश्य पत्रिका वाक्कुतुम्ब्म||

दुशिच्क्योरो दक्षकण च सेना धैर्य शचिर्या विक्रमं

भ्रातरं च गेहं क्षेत्रं मातुल भागिने बन्धु

मित्रं वाहनं मांतर च ||२२||

राज्यं गोमहिषसुगन्धव वस्त्रभूषा: पातालं हिबुक सुखाम्बुसेतुंध्य : |

राजाग्य सचिवक रत्मधभिविष्यज्जानासून

सुतजठर श्रुतिस्मृतशिच ||

लग्न फल:

बारह राशी ,नवग्रह,बारह भाव, को लेकर लग्न फल कहते है , प्रथम भाव को लग्न भाव कहते है जन्मपत्री में लग्न भाव को, काल पुरुष के चक्र में सिर भाग कहा जाता है उसी कर्म से जातक के लग्न का स्वामी सप्तम घर के सप्तम भाव के उपर कितना शुभ-अशुभ फल देता है यह भी बताता है|

श्लोक:

शिरोवक्त्रोरोहज्जठररक्टीवशितप्रजनन-

स्थलान्यूरुजानंवायु गलकमिति जंधे पद्युगम |

विलग्ना कालांगन्यक्ति झष कुलिशान्तिममिद

भ्ल्न्धी विर्ख्याता सकलभवनान्नतानपि परे ||४ ||

5th हाउस फलादेश:

पंचम भाव शिक्षा एवं सन्तान के घर को कहते है जीवन का सबसे महत्वपूर्ण भाव पंचम भाव को कहते है |

शिक्षा:

पंचम भावं में बैठे हुए शुभ-अशुभ ग्रह की वजह से जातक की शिक्षा किस तरह प्राप्त होगी, अथवा नही होगी ,यह भी पंचम भाव से विचार किया जाता है |

संतान:

पंचम भाव से बैठे हुए शुभ-अशुभ ग्रहों से हमें ज्ञात होता है की जातक को संतान का सुख प्राप्त होगा या नहीं|

7th हाउस फलादेश:

जन्मपत्र  में सप्तम घर का भी उतना ही महत्वपूर्ण लग्न भाव है | जन्मपत्र में बैठे हुए ग्रह शुभ दृष्टि के द्वारा सप्तम घर को देख रहे हो, तो जातक को जो पति-पत्नी का सुख मिलना चाहिए, तो वो पूरी तरह से फल प्राप्त होता है | अगर लग्न भाव में क्रूर ग्रह बैठे हो तो जातक के सप्तम भाव  के उपर क्रूर प्रभाव पड़ता है| जो की दाम्पत्य जीवन में अच्छा प्रभाव नही डालता है |

हस्त रेखा विचार:

ज्योतिष और शास्त्र में हथेलियों पर छिपे हुए रेखा द्वारा समस्या का निदान किया जाता है, हथेली के निचे भाग को मनिबन्द ,प्रथम भाग को शुक्र पर्वत ,दुसरे भाग को गुरु पर्वत ,तीसरे भाग  को शनि पर्वत, चौथे भाग  को सूर्य पर्वत, एवं पंचम भाग को चन्द्र पर्वत कहते है |

भाग्य रेखा:

मष्तिस्क रेखा ,हृदय रेखा,स्वास्थ रेखा,विदेशी यात्रा के भी हथेलियों की रेखाओं के द्वारा फलादेश किया जाता है |

Leave your Comment